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*हसदेव नदी, छुरी झोराघाट, बरमपुर, का अस्तित्व रेत माफियाओं ने खतरे में डाल दिया है गेवरा घाट पर अवैध रेत उत्खनन का खेल जोरो पर है एक बार फिर बेखौफ अंदाज में शुरू हो गया है दिनदहाड़े नदी, नलों से रेत निकाले का खेल माईनिंग विभाग के अधिकारी या तो किसी नेता मंत्री के दबाव में है या उनका कमीशन समय में पूरा मिल जाता है इसलिए खुला छूट देकर रखे हुए हैं जिससे पर्यावरण भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो रही है शासन के मापदंड के हिसाब से रेत का उठाव नहीं हो रहा है रेत माफिया बड़े-बड़े माउंटिंग मशीन, जेसीबी जैसे अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं और नदी का सीना को चीर रहे हैं इसे परिवहन के लिए बड़े-बड़े हाईवा ट्रक एवं ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है शासन के नियम अनुसार रेत खदान में बेलचा, फवड़ा गैईती झोड़ी का इस्तेमाल करना है जिससे नदी नाले अपने स्वरूप एवं अस्तित्व को ना खोसके और पर्यावरण का बचाव भी सुरक्षित रह सके*

कोरबा। हसदेव नदी, छुरी झोराघाट, बरमपुर, का अस्तित्व रेत माफियाओं ने खतरे में डाल दिया है गेवरा घाट पर अवैध रेत उत्खनन का खेल जोरो पर है एक बार फिर बेखौफ अंदाज में शुरू हो गया है दिनदहाड़े नदी, नलों से रेत निकाले का खेल माईनिंग विभाग के अधिकारी या तो किसी नेता मंत्री के दबाव में है या उनका कमीशन समय में पूरा मिल जाता है इसलिए खुला छूट देकर रखे हुए हैं जिससे पर्यावरण भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो रही है शासन के मापदंड के हिसाब से रेत का उठाव नहीं हो रहा है रेत माफिया बड़े-बड़े माउंटिंग मशीन, जेसीबी जैसे अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं और नदी का सीना को चीर रहे हैं इसे परिवहन के लिए बड़े-बड़े हाईवा ट्रक एवं ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है शासन के नियम अनुसार रेत खदान में बेलचा, फवड़ा गैईती झोड़ी का इस्तेमाल करना है जिससे नदी नाले अपने स्वरूप एवं अस्तित्व को ना खोसके और पर्यावरण का बचाव भी सुरक्षित बच सके लेकिन यहां जस्ट उल्टा नजर आ रहा है रेत माफिया अपने हिसाब से सिर्फ और सिर्फ रेत निकालने के लिए बड़े-बड़े मशीनों का इस्तेमाल के साथ-साथ अपने पहुंच और पावर का भी इस्तेमाल कर रहे हैं और अधिकारियों को दवा बनाकर गलत कार्य कर रहे हैं यह सभी रेत दरी॔ स्थित निर्माण धीन पावर प्लांट में जा रहा है
साथी कोयला खदान, बैच मिक्स प्लांट तक सप्लाई किया जा रहा है जिसमें तस्करों की दबंगई साफ नजर आ रही है माइनिंग विभाग और पर्यावरण विभाग खुली सहमति चैन माउंटिंग मशीन, जेसीबी मशीन का इस्तेमाल नदी, नालों मे इस्तेमाल लोड करने के लिए किया जाता है।

सरकार बदली, लेकिन रेत से “तेल” निकालने वाला खेल नहीं बदला। आरोप है कि सज्जाद गिरोह गेवरा घाट से लेकर दर्री की ओर खुलेआम रेत निकाल रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस अवैध कारोबार में बरमपुर के एक पार्षद पुत्र हीरू जयसवाल, कादिर खान और दीपक की टीम सक्रिय है, जो माइनिंग विभाग को सेट कर ऊंचे दामों पर रेत बेच रही है और रेत माफिया लाखों करोड़ों अवैध रूप से कम रहे हैं।

सीतामणी रेत घाट का हाल भी अलग नहीं है। यहां से दिनभर अवैध रेत निकल रही है, जिससे माइनिंग डिपार्टमेंट और पुलिस दोनों की छवि पर सवाल उठ रहे हैं। ट्रैक्टरों के फर्राटे और सिंडिकेट की दबंगई देखकर ऐसा लगता है कि सरकार चाहे जिसकी हो, राज अब भी रेत तस्करों का ही चल रहा है।
सूत्रों का दावा है कि माइनिंग विभाग के ही दो नगर सैनिक तस्करों के साथ खड़े हैं, जो ऑफिस और अधिकारियों की पल-पल की जानकारी देकर सेवा शुल्क वसूलते हैं। इतना ही नहीं, कोतवाली क्षेत्र में चलने वाले ट्रैक्टर मालिकों से भी रोजाना फिक्स “उपहार” पहुंचाया जा रहा है, ताकि कोई रोक-टोक न हो।

 

हैरानी की बात यह है कि कई बार रेत से लदे ट्रैक्टरों को सड़क पार कराने में ट्रैफिक के सिपाही भी मदद करते दिख जाते हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सज्जाद गैंग के इस अवैध खेल में पुलिस और माइनिंग डिपार्टमेंट की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
जब सब कुछ खुलेआम हो रहा है तो कार्रवाई कब होगी? या फिर हसदेव नदी यूं ही रेत माफियाओं की भेंट चढ़ती रहेगी। और अपना स्वरूप बदल देगी नदी में शुद्ध पानी का भी अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा जिसे कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लोग जीवन दयानी नदी में से एक हसदेव नदी को कहा जाता है नए कलेक्टर की पदस्थ होने के बाद परिदृश्य बदलते हुए नजर आ रहे हैं अब देखना है की इन रेत माफियाओं के खिलाफ कब करवाई होती है धन्यवाद

कलेक्टर कुणाल दुदावत से इस विषय पर चर्चा करने पर उन्होंने कहा रेत माफिया हो या मुरूम, गिट्टी, ईट सभी में नियमित पूर्वक कार्रवाई की जाएगी कोई भी गलत तरीके से कार्य करते पकड़े जाएंगे उन पर कठोरता पूर्वक कार्रवाई की जाएगी किसी को बक्सा नहीं जाएगा।