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*25.1.2026 दिन रविवार को जल संसाधन विभाग बिलासपुर के मुख्य अभियंता एस आर सोनोने अधीक्षण अभियंता ए आर कुर्रे कार्यपालन अभियंता ई एक्का सहायक अभियंता सी बी सिंह अनुसंधान अधिकारी संजीव त्रिवेदी छुरी जलाशय का लाइनिंग निर्माण कार्य मे किए गए भ्रष्टाचार का निरीक्षण करने के लिए धुरी,पाथा आए थे निर्माण कार्य से संतुष्ट नहीं हुए अधिकारी कोरबा के जल संसाधन विभाग माइनर के अधिकारी एवं स्टाफ ठेकेदार के लोग जांच अधिकारियों को सहयोग प्रदान नहीं किय इसलिए जांच अधूरा रह गया प्राथमिक स्तर का जांच किया गया निरीक्षण कर टेप से नापा गया जहां पांच लोहे का सरिया लगाना था वहां तीन लोहे का सरिया लगाया गया है बेस्ट कंक्रीट की गुणवत्ता ठीक नहीं है जांच में गैती, फवड़ा, छीनी, हथोड़ा, कटर मशीन जैसे उपकरणों का इस्तेमाल होना था लेकिन जांच अधिकारियों के पास यह सामग्री की सुविधा नहीं थी लाइनिंग निर्माण कार्य की गुणवत्ता स्तर हिन थी जांच के लिए फिर से आएंगे अधिकारी*

धुरी लाइनिंग निर्माण पाथा जलाशय  

25.1.2026 दिन रविवार को जल संसाधन विभाग बिलासपुर के मुख्य अभियंता एस आर सोनोने
अधीक्षण अभियंता ए आर कुर्रे
कार्यपालन अभियंता ई एक्का
सहायक अभियंता सी बी सिंह
अनुसंधान अधिकारी संजीव त्रिवेदी छुरी जलाशय का लाइनिंग निर्माण कार्य का निरीक्षण करने के लिए आए थे निर्माण कार्य से संतुष्ट नहीं हुए अधिकारी कोरबा के जल संसाधन विभाग माइनर के अधिकारी एवं स्टाफ ठेकेदार के लोग जांच अधिकारियों को सहयोग प्रदान नहीं किय इसलिए जांच अधूरा रह गया प्राथमिक स्तर का जांच किया गया निरीक्षण कर टेप से नापा गया जहां पांच लोहे का सरिया लगाना था वहां तीन लोहे का सरिया लगाया गया है जांच में गैती, फवड़ा, छीनी, हथोड़ा, कटर मशीन जैसे उपकरणों का इस्तेमाल होना था लेकिन जांच अधिकारियों के पास यह सामग्री की सुविधा नहीं थी लाइनिंग निर्माण कार्य की गुणवत्ता स्तर हिन थी निर्माण छिन लाइनिंग के किनारे एक किसान का खेत है उससे लोहे का सबल, हथौड़ी, और छिनी मंगाया गया और लाइनिंग के अंदर कंक्रीट को खोदकर कर देखा गया उस स्थान में मात्र 2 इंच का बेस कंक्रीट किया गया है किसी स्थान में तीन से चार इंच बेस कंक्रीट किया गया है जिसकी तस्वीर एवं वीडियो लिया गया सबूत के तौर पर लाइनिंग के निर्माण कार्य जहां हो चुके हैं उसके ऊपर पानी का नियमित रूप से छिड़काव भी नहीं किया जा रहा है लाइनिंग निर्माण कार्य होने के बाद मिट्टी से बांधकर, बोरा को बिछाकर पानी भरा जाता है जिससे अच्छे से कंक्रीट कार्य मजबूती से पाक सके बिना पानी के कंक्रीट निर्माण कार्य सफेद राखड के बराबर होता है वही स्थिति वर्तमान में छुरी लाइनिंग में नजर आ रहा है जब भी लर्निंग का कार्य किया जाता है वह सीधा होता है लेकिन आप देख सकते हैं टेढ़ा-मेढ़ा निर्माण कार्य किया गया है कहीं मोटा है कहीं पतला है कहीं मुड़ा हुआ है वही जिस लाइनिंग से पानी बहन होना है वह भी अप- डाउन अप- डाउन है तो पानी का फ्लौ का स्तर कैसे तेज गति से किसान के प्यासे खेतों में पहुंच पाएगा यह समझ से परे हैं छत्तीसगढ़ सरकार जनता की टैक्स के पैसे से जनता को सुविधा पहुंचने के लिए खास करके किसानों को खरीब फसल एवं रवि फसल में पानी मिल सके इसलिए यह योजना बनाती है और करोड रुपए खर्च करती है की किसान को आर्थिक स्तर से मजबूत किया जा सके उनका जिवन स्तर मजबूत हो सके लेकिन छुरी में जस्ट उल्टा नजर आ रहा है लेकिन अधिकारी और ठेकेदार शासन के इस महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगाने में लगे हुए हैं दलाली और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए यह सब खेल किया जा रहा है जिसकी कमिशन अधिकारी को मिलेगा किसी का खेती के लिए पानी मिले या ना मिले उनसे उनका कोई लेना-देना नहीं है कमीशन का हिस्सा बराबर ठेकेदार और अधिकारी आपस में बाटेंगे यही स्थिति वर्तमान में छुरी लाइनिंग निर्माण कार्य में नजर आ रहा है वहां के स्थानीय किसानों ने बताया की छुरी लाइनिंग निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर कई बार विभाग के अधिकारियों से आपत्ति दर्ज कर चुके हैं लेकिन किसी की कोई परवाह न करते हुए बेधड़क गुणवत्ता हीन कार्य किया जा रहा है किसी प्रकार का कोई अंकुश स्थानीय जल संसाधन विभाग के द्वारा नहीं किया जा रहा है जल संसाधन विभाग माइनर के प्रभारी कार्यपालन अभियंता नयन रंजन चौधरी का ठेकेदार के साथ पार्टनरशिपिंग करके गुणवत्तापूर्ण कार्य किया जा रहा है बिलासपुर से आए जांच दल का कहना है कि अभी जांच का कार्य प्राथमिक दौर पर किया गया है अभी जांच पूर्ण नहीं हुआ है फिर से जांच करने के लिए आएंगे।

छुरी नहर की लंबाई 3 किलोमीटर की है बेस कंक्रीट 30 सेंटीमीटर किया जा रहा है जो की 45 सेंटीमीटर का होना चाहिए लेकिन ठेकेदार द्वारा कहीं 2 सेंटीमीटर कहीं 4 सेंटीमीटर का निर्माण कार्य बेस्ट कंक्रीट में किया गया है।

निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद पानी किसी किसान को खेती के लिए मिल पाएगा या नहीं यह संदेह का विषय है लगता है की पानी जब खेती के लिए छोड़ा जाएगा तो लाइनिंग टूट सकता है या पानी लीकेज हो सकता है या कुछ दिनों में जर्जर हो जाएगा जिससे खेतों तक किसानों को पानी नहीं मिल पाएगा शासन का पैसे का विभाग के द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है जो जांच राज्य शासन स्तर पर आज हो रहा है वह बहुत जरूरी है अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ कठोरता पूर्वक कार्रवाई होनी चाहिए और ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करना चाहिए वही निर्माण कार्य में 40 एम एम का गिट्टी का इस्तेमाल किया गया है जो ओवर साइज है सीमेंट एक बालू दो गिट्टी चार होना चाहिए वही अंदर का भाग 75 से 85 सेंटीमीटर होना चाहिए आरसीसी में एक सीमेंट दो रेत तीन गिट्टी होना चाहिए लेकिन ठेकेदार द्वारा मनमानी करते हुए नियम कानून को दरकिनार कर गुणवत्ताहीन कार्य किया जा रहा है जो अब तक जांच में सामने आए हैं अभी 25 एक 2026 को जांच टीम आई थी वह प्राथमिकी स्तर पर जांच प्रारंभ कर दिया गया है और उनको भी स्थानीय कोरबा जल संसाधन विभाग माइनर के अधिकारी एवं ठेकेदार के द्वारा किसी प्रकार का कोई सहयोग प्रधान नहीं किया गया जिससे जांच प्रभावित हुआ है और फिर से जांच करने के लिए आना पड़ेगा जांच में इस्तेमाल करने वाली कंक्रीट कटिंग मशीन एवं गैति फवड़ा हथोड़ा जैसा सभी सामग्री लेकर फिर से आएंगे और जो सामग्री जांच में निकलेगा उसे जप्त कर के अपने साथ ले जाएंगे टेक्निकल विभाग से गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी जो ठेकेदार द्वारा शासन से एग्रीमेंट किया है उसके अनुरूप है या नहीं तभी दूध का दूध और पानी का पानी होगा

वही पाथा जलाशय एक सफेद हाथी की तरह नजर आ रहा है अभी फरवरी का महीना चल रहा है और एक बूंद पानी नहीं है कैसे खेती करने वाले 400 हेक्टर में किसानों को पानी दे सकेंगे यह समझ से परे हैं

मेरा 28 साल के पत्रकारिता में ऐसा पाथा जैसे जलाशय नहीं देखा है जिसमें करोड रुपए खर्च राज्य सरकार कर रही है और जिसका एक बूंद पानी किसानों को नहीं मिल पाएगा निर्माण होने के बाद और ना ही भविष्य में मिलेगा क्योंकि उसकी डिजाइन साइड सलेक्शन बहुत ही गलत स्थान में किया गया है पाथा जलाशय के अंदर चारों तरफ मिट्टी का ढेर और पत्थर चट्टान भारी अधिक मात्रा में नजर आ जाएंगे साथ ही बड़े-बड़े पेड़ पौधे लगे हुए हैं जो शुलूस गेट का निर्माण किया गया है वहां तक पानी पहुंच नहीं सकता तो खेती के लिए किसानों को कैसे पानी मिल पाएगा साथी एक वर्षा ऋतु में सुलुर गेट पूरी तरीके से मिट्टी से भर जाएगा क्योंकि सूरज गेट जमीन से काफी नीचे है यह एक भारी टेक्निकल गड़बड़ी है या तो उसे तोड़कर नया बनाना पड़ेगा और इसके अलावा कोई विकल्प नहीं नजर आ रहा है स्पाट में देखने से वही जो तटबंध मिट्टी का बना हुआ है उसका भी गुणवत्ता ठीक नहीं है और बालू मिश्रित मिट्टी है जिससे पानी का रिसाव होगा तटबंध में कनहर मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है जिससे पानी का रिसाव ना हो सके और जलाशय का मजबूती बना रहे वही जो पत्थर का इस्तेमाल पिचिंग कार्य के लिए किया गया है वह पिचिंग देखने के बाद ऐसा लगता है कि किसी अनाड़ी गांव का व्यक्ति के द्वारा पिचिंग कार्य किया गया है इतने बड़े-बड़े कार्यपालन अभियंता एसडीओ, सब इंजीनियर टाइम कीपर के होते हुए भी ऐसे पिचिंग कार्य कैसे किया गया और ठेकेदार को कैसे इसका राशि का भुगतान किया गया यह समझ से परे हैं कोई भी पत्थर का साइज एक जैसे नहीं है कहीं बड़ा-बड़ा बोलड़र है तो कहीं छोटा-छोटा गिट्टी है वह भी जंगल और पहाड़ो का एक साइज में पिचिंग का कोई भी पत्थर आपको नजर नहीं आएगा बागो डेम में जो पत्थर लगाया गया है उसका चारों कोण बराबर है तभी एक दूसरे से पत्थर चिपक कर रहते हैं और पानी का फ्लो को झेल सकते हैं लेकिन पाथा जलाशय में ऐसा नहीं है
वेस्ट वियर, डाउन, स्ट्रीमर, फ्लोर, मे तीन स्टेप का कंक्रीट ठेकेदार को डालना था शासन के नियम अनुसार लेकिन ठेकेदार द्वारा एक ही बेस कंक्रीट का कार्य किया जा रहा है 90 सेंटीमीटर फ्लोर के हिसाब से

छत्तीसगढ़ सरकार रायपुर के जल संसाधन विभाग के चीफ सेक्रेटरी राजेश टोप्पो ने बिलासपुर के मुख्यअभियन्ता एस.आर.सोनोने को जांच टीम का जिम्मेदारी दी है उनके साथ और चार वरिष्ठ अधिकारी उस जांच टीम में शामिल है एस.आर.सोनोने से बात करने पर उन्होंने कहा कि आज 25.1.2026 को प्राथमिक की दौर पर पाथा जलाशय का निरीक्षण किया गया वहां भी बहुत से कमियां नजर आ रही है आगे जांच की जाएगी वही छुरी जलाशय के लाइनिंग निर्माण कार्य का निरीक्षण करने के लिए आए थे जांच से हम संतुष्ट नहीं है हमको बहुत सी खामियां नजर आई है और निर्माण कार्य के गुणवत्ता से भी हम संतुष्ट नहीं है साथ ही कोरबा के जल संसाधन माइनर विभाग के अधिकारी एवं ठेकेदार के द्वारा हमें किसी प्रकार का कोई सहयोग प्रदान नहीं किया गया जिससे जांच प्रभावित हुआ है आने वाले दिनों में हम फिर से जांच करने के लिए आएंगे और साथ में कंक्रीट काटने वाली मशीन गैती, फावड़ा, छिनी, हथोड़ा, सहीत सभी सामग्री लेकर आएंगे और अच्छे से निर्माण धिन कार्यों का सूक्ष्म तरीके से जांच कर जो भी मटेरियल निकलेगा उसे बोरे में भरकर बिलासपुर ले जाकर टेक्निकल टीम से गुणवत्ता का जांच करेंगे और किसी भी अधिकारी या ठेकेदार अगर दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई जरूर होगी हम उनके विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य सरकार जल संसाधन विभाग रायपुर को रिपोर्ट एवं निर्माण स्थल का फोटो वीडियो बनाकर भेजेंगे राज्य सरकार इस विषय में क्या करती है वह उनका मामला है बाकी जो भी कार्रवाई होगा वह छत्तीसगढ़ राज्य सरकार जल संसाधन विभाग के स्तर पर होगा।
इस जांच टीम में इन अधिकारियों का  अहम भूमिका रही है।
ए आर कुर्रे अधिक्षण अभियंता
ई एक्का कार्यपालन अभियंता
सी बी सिंह सहायक अभियंता
संजीव त्रिवेदी अनुसंधान अधिकारी

आपको बता दें जल संसाधन विभाग वर्तमान में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पास है और उन्हीं के विभाग में करोड़ों रुपए का धड़ल्ले से भ्रष्टाचार अधिकारी एवं ठेकेदार मिलकर कर रहे हैं माननीय देश के प्रधानमंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री जी हमेशा बोलते हैं कि छत्तीसगढ़ में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है तो कोरबा जिले के लिए विशेष छूट दिया गया है क्या और अगर नहीं दिया गया है तो ऐसे भ्रष्ट अधिकारी और ठेकेदार के ऊपर कार्रवाई करते हुए ब्लैक लिस्ट करना चाहिए और प्रभारी कार्यपालन अभियंता नयन रंजन चौधरी को तत्काल सस्पेंड करना चाहिए और पैसे की रिकवरी भी होनी चाहिए नयन रंजन चौधरी जूनियर अधिकारी हैं इसी राज्य सरकार ने प्रभारी कार्यपालन अभियंता माइनर विभाग में पदस्थ किया है जो नियम विरुद्ध है क्योंकि उनके ही कार्यालय में चार वरिष्ठ अधिकारी वर्तमान में पदस्थ है एच एक्का को वर्तमान में प्रमोशन मिला है कार्यपालन अभियंता बने हैं सहायक अभियंता कटघोरा क्रमांक 2 आर एम ओझा एच पी टोडे सहायक अभियंता पाली, कमलेश तिवारी सहायक अभियंता कटघोरा क्रमांक 1 यह सभी अधिकारी प्रभारी कार्यपालन अभियंता नयन रंजन चौधरी से वरिष्ठ हैं शासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। और सीनियर अधिकारियों को कार्यपालन अभियंता बनाना चाहिए।

हमारी नजर पाथा जलाशय एवं छुरी लाइनिंग निर्माण कार्य जांच के लिए जो टीम आएगी उन पर हमारी पैनी नजर रहेगी कि आगे क्या कार्रवाई होती है