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*ग्राम कथरीमाल के 88 वर्ष की उम्र में भी अटूट जज़्बा : किसान खोलबहरा कुर्रे बने नई पीढ़ी के लिए मिसाल*

कोरबा,

ग्राम कथरीमाल के खेतों में आज भी एक ऐसा किसान सक्रिय है, जिसकी उम्र भले ही अट्ठासी वर्ष हो चुकी हो, लेकिन मेहनत और हौसले में युवाओं से कहीं आगे है। यह किसान हैं खोलबहरा कुर्रे, जो अपनी लगन, अनुशासन और कृषि के प्रति अटूट समर्पण से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
खोलबहरा न केवल खेती को अपनी जीवनशैली मानते हैं, बल्कि हर वर्ष की तरह इस बार भी उन्होंने अपने 18 एकड़ खेत में धान की भरपूर पैदावार लेकर यह साबित कर दिया कि उम्र यदि मन में उत्साह हो तो सिर्फ एक संख्या भर है।
इस सीजन उन्होंने कुल 196 क्विंटल धान उपार्जन केंद्र में बेचा। बचपन से खेती-किसानी से जुड़े रहने वाले खोलबहरा अच्छी तरह जानते हैं कि खेत में खड़ी फसल अनगिनत परिश्रम का नतीजा होती है। उनके अनुसार फसल तैयार करना जितना कठिन काम है, उसे बेचने की प्रक्रिया पहले उससे भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहती थी। उपार्जन केंद्रों में अव्यवस्था, लम्बी कतारें, रात-रातभर जागकर धान की रखवाली, ये सब किसानों के लिए आम बात थी। कम कीमत और असुविधाओं के कारण मेहनत का उचित मूल्य मिल पाना भी मुश्किल था। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। वे बताते हैं कि इस वर्ष 12 तारीख को उन्होंने ऑनलाइन टोकन कटाया और तय समय पर सीधे केंद्र पहुँचकर आसानी से धान बेचा। अब केंद्र में बैठने, पानी पीने और लेनदेन की तत्काल सुविधा उपलब्ध है। बैंक की लाइन में घंटों खड़े रहने की जरूरत भी नहीं पड़ती क्योंकि धान बेचने के बाद राशि जल्द ही सीधे खाते में पहुँच जाती है। इस व्यवस्था ने किसानों के लिए पूरी प्रक्रिया को सरल, सम्मानजनक और परेशानी मुक्त बना दिया है।
खोलबहरा के परिवार में उनके दो बेटे हैं और कुल आठ से दस सदस्य मिलकर खेती के हर चरण बुवाई, कटाई और ढुलाईकृमें सहयोग करते हैं। यह सामूहिक मेहनत ही उनके परिवार की खुशियों की जड़ है। पिछले वर्ष धान बेचने से मिली आमदनी से उन्होंने अपना घर बनवाया था, और इस वर्ष वे नाती की शादी की तैयारी के साथ कुछ गहना खरीदने का मन भी बनाए हुए हैं। 88 वर्ष की उम्र में भी खेतों में सक्रिय इस किसान की कहानी संघर्ष, बदलाव और सफलता से भरी हुई है। खोलबहरा कुर्रे की जीवटता यह साबित करती है कि सही व्यवस्था, सरकारी सहयोग और परिवार के समर्थन से किसानों का जीवन किस तरह बदले और सँवरे और किस तरह एक किसान नई पीढ़ी को मेहनत, आशा और उन्नति का मार्ग दिखा सकता है।