*कोरबा ऊर्जा नगरी में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने से गहराया स्वास्थ्य पर संकट PM-2.5 और PM-10 बना सबसे बड़ा खतरा, प्रशासन और उद्योगों पर लापरवाही के आरोप,जुर्माना सहित सख्त कार्यवाही की उठ रही मांग, न्यायपालिका से उम्मीद, स्थायी समाधान की जरूरत रात और दिन हो रही है राखड़ की वर्षा, उद्योग मंत्री लखन देवांगन कोरबा जिले के रहने वाले हैं क्या उनको यह गंभीर समस्या दिखाई नहीं दे रहा है, क्या कोरबा की जनता उनको लाल बत्ती फॉलो गार्डन में घूमने के लिए ही चुना है, प्रदूषण की समस्या का स्थाई समाधान अगर नहीं करते हैं तो आने वाले विधानसभा चुनाव के समय उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा और उसका फायदा विपक्ष पार्टी को मिलेगा*



*कोरबा ऊर्जा नगरी में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने से गहराया स्वास्थ्य पर संकट PM-2.5 और PM-10 बना सबसे बड़ा खतरा, प्रशासन और उद्योगों पर लापरवाही के आरोप,जुर्माना सहित सख्त कार्यवाही की उठ रही मांग, न्यायपालिका से उम्मीद, स्थायी समाधान की जरूरत रात और दिन हो रही है राखड़ की वर्षा, उद्योग मंत्री लखन देवांगन कोरबा जिले के रहने वाले हैं क्या उनको यह गंभीर समस्या दिखाई नहीं दे रहा है, क्या कोरबा की जनता उनको लाल बत्ती फॉलो गार्डन में घूमने के लिए ही चुना है, प्रदूषण की समस्या का स्थाई समाधान अगर नहीं करते हैं तो आने वाले विधानसभा चुनाव के समय उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा और उसका फायदा विपक्ष पार्टी को मिलेगा*
प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने से गहराया स्वास्थ्य संकट
* PM-2.5 और PM-10 बना सबसे बड़ा खतरा
* प्रशासन और उद्योगों पर लापरवाही के आरोप
* जुर्माना सहित सख्त कार्यवाही की उठ रही मांग
* न्यायपालिका से उम्मीद
* स्थायी समाधान की जरूरत
कोरबा छत्तीसगढ़ के प्रमुख औद्योगिक जिले कोरबा में लगातार बढ़ता वायु प्रदूषण अब आम जनजीवन और स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का आरोप लगाते हुए कहना है कि औद्योगिक इकाइयों और कोयला आधारित ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाले प्रदूषक एवं राखड तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
कोरबा को देशभर में “ऊर्जा नगरी” के रूप में जाना जाता है। जिले में एनटीपीसी कोरबा सुपर थर्मल पावर स्टेशन, हसदेव थर्मल पावर स्टेशन, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थर्मल पावर स्टेशन, अडानी कोरबा पावर लिमिटेड, बालको एल्यूमिनियम प्लांट सहित कई बड़े-बडे कोयला आधारित उद्योग संचालित हैं। इसके साथ ही बांगो हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन भी जिले में स्थित है, जो ऊर्जा उत्पादन में योगदान देता है।
* PM-2.5 और PM-10 बना सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार कोरबा की हवा में PM-2.5 और PM-10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। ये कण सीधे फेफड़ों में पहुंचकर दमा, सांस की बीमारी, हृदय रोग, त्वचा रोग और कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार यदि PM-2.5 का स्तर 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक हो जाए, तो बच्चों और बुजुर्गों के लिए बाहर निकलना जोखिम भरा माना जाता है, जबकि कोरबा में कई बार यह स्तर इससे कहीं अधिक दर्ज किया गया है।
* प्रशासन और उद्योगों पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रदूषण के मुद्दे पर प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी दिखाई देती है। जब भी प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाई जाती है, उसे व्यक्तिगत या राजनीतिक मुद्दा बताकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। स्वास्थ्यकर्मी बुजुर्गों और बच्चों को घर के अंदर रहने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन रोज़गार और दैनिक जरूरतों के कारण लोग जोखिम उठाने को मजबूर हैं।
* जुर्माना सहित सख्त कार्यवाही की उठ रही मांग
नागरिकों का सवाल है कि जब किसी एक अपराध पर कठोर सजा का प्रावधान है, तो सामूहिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर केवल आर्थिक जुर्माना क्यों लगाया जाता है। उनका आरोप लगाते हुए कहना है कि प्रदूषण रोकने के लिए निरंतर निगरानी, तकनीकी सुधार और दंडात्मक कार्यवाही अनिवार्य होनी चाहिए।
साथी प्रदूषण मापक यंत्र जगह-जगह लगाकर निरंतर जांच करते रहना चाहिए।
* न्यायपालिका से उम्मीद
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हाल ही में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा कोरबा में फ्लाई ऐश डंपिंग पर रोक लगाने को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर और भी सख्त फैसले लिए जा सकते हैं।
* कोरबा जिले के प्रदूषण को लेकर स्थायी समाधान की जरूरत*
कोरबा जिले के नागरिकों और सामाजिक संगठनों का सुझाव है कि पहले प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उद्योग प्रबंधन मिलकर ठोस कार्ययोजना बनाएं। यदि इसके बाद भी हालात नहीं सुधरते, तो वे न्यायिक हस्तक्षेप का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
लोगों को उम्मीद है कि कोरबा का प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर इस गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का समाधान निकालेंगे, ताकि “ऊर्जा नगरी” के निवासी सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जी सकें।
कोरबा विधानसभा के विधायक लखनलाल देवांगन वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार के कैबिनेट उद्योग मंत्री में से एक है और उनके गृह जिला कोरबा है इसके बावजूद भी प्रदूषण और राखड़ में कोई उनका नियंत्रण नहीं है ऐसा लगता है कि उनके द्वारा उद्योग और खदानों को खुली छूट एवं खुला संरक्षण देकर रखे हुए हैं क्या उनको नजर नहीं आ रहा है कि कोरबा जिले में प्रदूषण का स्तर दिनों दिन बढ़ते जा रहा है और राखड़ का वर्षा हो रहा है जिससे फलदार वृक्ष-सब्जी-भाजी नदी-नाले मकान के छत में राखड़ जम रहा है वृक्षों के पत्तों के ऊपर आपको राखड़ का परत नजर आ जाएगा जिससे आम लोगों को विभिन्न प्रकार के बीमारियों से ग्रसित होना पड़ रहा है क्या गुनाह है कोरबा के लोगों की क्या उन्हें स्वस्थ वायु, स्वस्थ पानी, एवं स्वस्थ स्वस्थ, खाने पीने का सामग्री नहीं मिलना चाहिए हर 5 वर्ष में सत्ता आते और जाते रहते हैं अधिकारी जिले में आते और जाते रहते हैं लेकिन इस गंभीर समस्या का समाधान कोई नहीं करता है राजनीति पार्टी के लोग जब विपक्ष में रहते हैं तो उनको प्रदूषण और विभिन्न प्रकार की समस्या नजर आती है और जब सत्ता में बैठ जाते हैं तो उनको प्रदूषण या और उद्योग खदानों से होने वाली समस्या नजर नहीं आती सिर्फ उद्योगपतियों का अटैची नजर आता है यही सत्य बात है मैं 28 वर्ष की पत्रकारिता में यही देखते आ रहा हूं नेता बदल गए अधिकारी बदल गए लेकिन कोरबा जिले की समस्या जस की तस बनी हुई है और आने वाले दिनों मे यह समस्या विकराल रूप लेते जा रही है और इंसानों की उम्र कोरबा जिले में तेजी से घटते जा रहा है अधिकांश लोग विभिन्न प्रकार के असाध्य बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं इसका सबसे मुख्य कारण वायु प्रदूषण जल प्रदूषण उद्योग से निकलने वाले राखड़ प्रदूषण है। धनयवाद






