*छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला खनिज न्यास मद के दुरुपयोग से संबंधित शिकायत की जांच के लिए बिलासपुर संभाग आयुक्त की ओर से गठित एक टीम बुधवार को कोरबा पहुंची इस टीम में उपायुक्त (विकास) हरिशंकर चौहान, उपायुक्त (राजस्व) स्मृति तिवारी और लेखाधिकारी संभाग आयुक्त कार्यालय स्मिता पांडे को शामिल किया गया है, यह जांच टीम खनिज न्यास मद के दुरुपयोग होने वाले भ्रष्टाचार से संबधित शिकायतों की जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी, टीम को 15 के दिन भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा गया है,अजीत कुमार वसंत ने नहीं की जांच फाइल दबाकर बैठ गए थे*
कोरबा. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला खनिज न्यास मद के दुरुपयोग से संबंधित शिकायत की जांच के लिए बिलासपुर संभाग आयुक्त की ओर से गठित एक टीम बुधवार को कोरबा पहुंची इस टीम में उपायुक्त (विकास) हरिशंकर चौहान, उपायुक्त (राजस्व) स्मृति तिवारी और लेखाधिकारी संभाग आयुक्त कार्यालय स्मिता पांडे को शामिल किया गया है। यह जांच टीम खनिज न्यास मद के दुरुपयोग होने वाले भ्रष्टाचार से संबधित शिकायतों की जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी। टीम को 15 के दिन भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा गया है।
अजीत कुमार वसंत ने नहीं की जांच फाइल दबाकर बैठ गए थे
इस मामले में संभाग आयुक्त कार्यालय ने एक से डेढ़ साल की अवधि में कोरबा के तत्कालीन कलेक्टर अजीत कुमार वसंत के नाम पांच बार पत्र भेजा गया। सभी पत्र में खनिज प्रतिष्ठान फंड के कुप्रबंधन और दुरूपयोग की जांच करने के लिए कहा गया था। लेकिन कोरबा में कलेक्टर रहते अजीत कुमार बसंत ने इस मामले की जांच नहीं कराई। तब शिकायतकर्ता ने बिलासपुर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। अब पूर्व कलेक्टर अजीत कुमर वसंत की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार कोरबा के सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी चौहान ने 22 अक्टूबर 2024 को कोयला मंत्रालय में एक शिकायत की थी। इसमें कोरबा जिले में जिला खनिज प्रतिष्ठान ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड के दुरूपयोग और कुप्रबंधन का आरोप लगाया गया था। कोयला मंत्रालय ने इस शिकायत को जांच के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को भेजा था। छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव ने शिकायत पत्र को जांच के लिए खनिज संसाधन विभाग को दिया। खनिज विभाग ने शिकायत को जांच के लिए बिलासपुर संभाग आयुक्त को भेजा। संभाग आयुक्त कार्यालय में कई माह तक शिकायत की जांच फाइलों बंद रही। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में संभाग आयुक्त कार्यालय से पत्राचार किया, तो शिकायत को जांच के लिए कोरबा कलेक्टर को भेज दिया गया। लेकिन इस शिकायत पर जांच नहीं हुई। कई माह तक इंतजार के बाद भी जब डीएफएम फंड के दुरूपयोग और कुप्रबंधन की जांच शुरू नहीं हुई, तो लक्ष्मी चौहान ने एक बार फिर कोल मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया और उन्होंने एक बार फिर शिकायत्त की लेकिन मामले की जांच शुरू नहीं हुई।
छत्तीसगढ़ के हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती
याचिकाकर्ता लक्ष्मी चौहान की याचिका पर सोमवार को बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने जिला खनिज न्यास फंड के दुरूपयोग से संबंधित अपना पक्ष हाईकोर्ट में रखा, तब राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने कोर्ट को बताया कि यह शिकायत खनन मंत्रालय भारत सरकार के अवर सचिव के द्वारा 20 नवंबर 2024 को राज्य सरकार तक पहुंची थी। इसके बाद बिलासपुर संभागायुक्त ने कोरबा के जिला अधिकारी को इसकी जांच करने कहा था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में जांच के लिए याचिकाकर्ता को 14 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजे कोरबा के खनिज न्यास कार्यालय में उपस्थित होने के लिए बुलाया गया है। इस मामले की ‘जांच के लिए संभागायुक्त की ओर से तीन सदस्यीय तीन समिति का गठन किया गया है।






