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*कोरबा पाली महोत्सव की तैयारी हेतु जनप्रतिनिधियों की बैठक 22 जनवरी को कोरबा जिला में विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर दो दिवसीय पाली महोत्सव का आयोजन पाली महोत्सव ग्राउंड केराझरिया में किया जायेगा,पाली महोत्सव की आवश्यक तैयारी हेतु जिले के जनप्रतिनिधियों की आवश्यक बैठक होना है*

कोरबा,

जिला में विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर दो दिवसीय पाली महोत्सव का आयोजन पाली महोत्सव ग्राउंड केराझरिया में किया जायेगा।
पाली महोत्सव की आवश्यक तैयारी हेतु जिले के जनप्रतिनिधियों की आवश्यक बैठक 22 जनवरी को दोपहर 12 बजे कलेक्टर सभाकक्ष कोरबा में आयोजित की गई है।

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित पाली शिव मंदिर एक 9वीं सदी का ऐतिहासिक और स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है, जिसका निर्माण बाणवंशी राजा विक्रमादित्य ने करवाया था और बाद में कलचुरी शासक जज्वाल्य देव ने इसका जीर्णोद्धार कराया; यह मंदिर बलुआ पत्थर से निर्मित है, जिसमें गर्भगृह में शिवलिंग और नंदी की मूर्ति है, और अपनी जटिल नक्काशी व अष्टकोणीय मंडप के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ सावन में भव्य मेला लगता है।

मुख्य विशेषताएँ
निर्माण: 9वीं सदी (लगभग 870-900 ईस्वी) में बाणवंशी राजा विक्रमादित्य द्वारा निर्मित, जिसे बाद में कलचुरी राजाओं ने सुधारा।

वास्तुकला: लाल बलुआ पत्थर से निर्मित, जिसमें जटिल नक्काशी और एक अद्वितीय अष्टकोणीय मंडप (अष्टकोणीय हॉल) है।
धार्मिक महत्व: गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करता है, और सावन के महीने में यहाँ भारी भीड़ भक्तों की उमड़ती है।
भौगोलिक स्थिति: कोरबा जिले के पाली गाँव में, कोरबा शहर से लगभग 50 किमी दूर।
पहुँचने का तरीका
आपको कोरबा जिले के पाली गाँव जाना होगा।
न्यायधानी बिलासपुर से पाली की दूरी लगभग 55 किमी है।

मंदिर की कलाकृति दक्षिण भारत के मंदिरों से मिलती-जुलती है।
यह मंदिर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।धन्यवाद