*जल संसाधन विभाग माइनर कोरबा छुरी जलाशय, पाथा जलाशय में किए गए भ्रष्टाचार की जांच के लिए, जल संसाधन विभाग के रायपुर चीफ सेक्रेटरी राजेश टोप्पो ने बिलासपुर सी. ई और ए.सी सहित कार्यपालन अभियंता एवं टेक्निकल टीम का गठन किया है कल सुबह 9:00 पहुंचेंगे अधिकारी जांच के लिए आज का भारत न्यूज़ द्वारा प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था*
कोरबा जल संसाधन विभाग माइनर में किए गए भ्रष्टाचार की जांच के लिए कल आएंगे उच्च स्तरीय अधिकारी
हमारे विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पीसीसी कंक्रीट के स्थान में आरसीसी किया गया है बिना लोहे के कंक्रीट किया जाता है इसके बाद लोहे बिछाकर कंक्रीट किया जाता है लेकिन निर्माण दिन स्थल को आप देख सकते हैं जमीन में लोहा बांधा जा रहा है छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा ड्राइंग में स्पष्ट रूप से दर्शाया जाता है इस ड्राइंग के हिसाब से कोई भी निर्माण कार्य का रूपरेखा तैयार किया जाता है और उसी के हिसाब से निर्माण कार्य किया जाता है जिसमें स्पष्ट उल्लेख रहता है कि कहां कितना कंक्रीट करना है कहां कहां पर कितना लोहे का छड़ का इस्तेमाल करना है उस सभी ड्राइंग डिजाइन को दरकिनार करते हुए ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए प्रभारी कार्यपालन अभियंता नयन चौधरी के द्वारा भर्राशाही करने लगे और उनसे कमिशन लेने लगे बिना लिए दिए कोई भी अधिकारी किसी भी ठेकेदार का कोई सपोर्ट खुलेआम तौर पर नहीं करता है लोहे का ड्राइंग का स्पेसिंग कितना है टेप से नापने पर पता चलेगा पीसीसी कंक्रीट की थिसनेस दोनों को नापने के बाद पूरा मामला सामने आ जाएगा ड्राइंग में पीसीसी कितना थिसनेस दिया है आरसीसी कितने एमएम दिया है लोहा से खोलकर चेक करना अति आवश्यक है तभी पता चलेगा कि उसमें क्या गड़बड़ी की गई है वही पाथा में फ्लोर स्ट्रीम पहले से बना हुआ है उसमें कंक्रीट करने का जो नियम है उसे फॉलो किया गया है या नहीं पहले 2 मी फिर डेढ़ मीटर फिर 90 सेंटीमीटर से कम थ्रो आउट डाल दिया गया है जो गलत है स्शलू गेट में प्लास्टर किया गया है मिट्टी पुराना है उसके ऊपर कैसे डाला गया है यह अभी जांच का विषय है क्या पुराने निर्माण कार्य का रिपेयरिंग करके फिर से पूरा पैसा निकालने में लगे हुए हैं अधिकारी ठेकेदार से मिलकर जो ठेकेदार द्वारा अनुबंध किया गया है उसकी दस्तावेज देखने से पता चलेगा कि उस दस्तावेज में क्या अनुबंध किया गया है वही जल संसाधन अनुविभागी अधिकारी क्रमांक 2 नंबर को काम स्वीकृत किया गया था उसको प्रभारी कार्यपालन अभियंता और ठेकेदार के द्वारा मिलकर जल संसाधन विभाग अनुविभागीय अधिकारी क्रमांक नंबर 1 में ट्रांसफर करके काम किया जा रहा है जो की नियमतः गलत है और यह अपराध की श्रेणी में आता है जिस अधिकारी को नियुक्त किया गया था उसने रिकॉर्ड मेंटेन नहीं किया है तीसरा व्यक्ति के द्वारा रिकॉर्ड मेंटेन कराया गया है यह भी घोर प्रशासनिक लापरवाही किस श्रेणी में आता है और सब जांच का विषय है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में प्रकरण दर्ज होना चाहिए और उनके वेतन से पैसे की वसूली किया जाना चाहिए क्योंकि राज्य सरकार इनको रहने के लिए मकान ऑफिस सरकारी गाड़ी और भारी भरकम वेतन सहित सारी सुविधा दे रही है उसके बावजूद भी इनके द्वारा खुले आम बेईमानी और भ्रष्टाचार किया जा रहा है ऐसे अधिकारियों पर लगाम छत्तीसगढ़ के राज्य सरकार को लगाने की आवश्यकता है जिससे भविष्य में ऐसी कोई पुनर्विवर्ती कोई अधिकारी ना कर सके जिससे शासन की छवि धूमिल हो।






